Bhasha Kise Kahate Hain?

Bhasha Kise Kahate Hain – जानिए भाषा किसे कहते है?

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दोस्तों आज हम इस पोस्ट में जानेंगे भाषा क्या हैं? भाषा के कितने प्रकार होते हैं? दोस्तों हम सब भाषा से भली-भाली परिचित हैं। भाषा का इतिहास कई वर्षों पुराना हैं। तो आइये इस पोस्ट के माध्यम से हम जानते हैं की Bhasha Kise Kahate Hain Udaharan Sahit.

Bhasha Kise Kahate Hain?

भाषा :- भाषा संस्कृत के भाष धातु से बना है, जिसका अर्थ है- बोलना, बताना आदि। आदिम अवस्था में मानव केवल संकेतो से ही अपने विचारो को दुसरो के सामने व्यक्त करता था। धीरे धीरे उसने बोलना सीखा फिर वह बोल कर अपने विचारो का आदान-प्रदान करने लगा। मानव मस्तिष्क के विकास के साथ-साथ लिपि का अविष्कार भी हुआ।

फिर मानव बोलकर व लिखकर अपने विचारों को दूसरों सामने व्यक्त करता है और दुसरो के विचारों से अवगत होता है। इस प्रकार भाषा का प्रयोग दो प्रकार से होता हैं।

(क) बोलकर (मौखिक भाषा)

(ख) लिखकर (लिखित भाषा)

Lipi Kise Kahate Hain?

लिपि :- जिन चिन्हों द्वारा हम मौखिक ध्वनियों को लिखकर प्रकट करते है, उन्हें ‘लिपि’ कहते हैं। सभ्यता के विकास के साथ-साथ लिपियों का भी विकास होता गया। आज संसार में कई लिपियाँ प्रचलित हैं। जैसे निम्लिखित लिपियों के आगे उनकी भाषाओ के नाम दिए गए हैं।

  1. देव नागरी लिपि – हिंदी, संस्कृत, मराठी, आदि
  2. रोमन लिपि – अंग्रेजी
  3. फ़ारसी लिपि – फ़ारसी, उर्दू, आदि
  4. गुरुमुखी – पंजाबी
  5. अरा – नेपाली

ब्राह्मी लिपि

भारत की अत्यंत प्राचीन लिपि को ब्राह्मी लिपि कहते हैं। ब्राह्मी से ही देवनागरी लिपि का विकास हुआ। साथ ही भारत की अन्य लिपियों का विकास भी ब्राह्मी लिपि से ही हुआ।

ध्वनि

उच्चारण से लेकर सुनने तक की अवधि में जो स्पदन वक्ता अपने वाक तन्तु के द्वारा वायुमंडल में करता है, उसे ध्वनि कहते हैं। ध्वनि ही भाषा का मूल आधार है स्पष्ट ध्वनियों के  रूप दो मूल रूप हैं। स्पष्ट ध्वनियाँ ही भाषा को जन्म देती है। स्पष्ट  ध्वनियाँ से वर्ण बनते हैं, वर्ण से शब्द, शब्द से वाक्य और वाक्य से भाषा बनती हैं।

भाषा का महत्व 

भाषा अभिवक्ति का सर्वोत्तम साधन हैं। भाषा के कारण ही मानव अन्य प्राणियों से श्रेष्ठ है। इस सृष्टि में मानव ही एक ऐसा प्राणी है जो अपने विचारो दुसरो से कह सकता है और दुसरो के विचार स्वयं ग्रहण कर सकता हैं।

भाषा के माध्यम से वह नाना प्रकार के ज्ञान प्राप्त करता हैं। हर विषय का ज्ञान प्राप्त करने के लिए भाषा ही माध्यम होती हैं। भाषा का क्षेत्र अत्यंत व्यापक होने के कारन यह अन्य विषयो के तुलना में सर्वोच्चम स्थान रखती है क्योकि भाषा के बिना किसी भी विषय का ज्ञान असम्भव है। इस समय विश्व के प्रत्येक देशो में कई भाषाएँ प्रत्युक्त होती है।

उप-भाषा

प्रत्येक भाषा का एक निश्चित क्षेत्र होता हैं और उसका वृहद लिखित साहित्य होता हैं। एक भाषा-क्षेत्र के अंतर्गत कई उपभाषाएँ पाई जाती है। उप-भाषा एक भाषा का वह स्थानीय रूप है, जिसमें लिखित साहित्य पाया जाता हैं। प्रत्येक भाषा-क्षेत्र में उसके बोलने की शैली, शब्द-अर्थ में परिवर्तन हो जाता हैं। यदि उस परिवर्तित रूप में श्रेष्ठ रचनाएँ लिखी होती हैं, तो वह उप-भाषा कहलाती है। उप-भाषा को लोक भाषा भी कह सकते हैं।

बोली

मुँह से बोलकर विचारों को प्रकट करने का सबसे सरल साधन ‘बोलो’ है। एक भाषा के अंतर्गत कई उप-भाषाएँ व एक उप-भाषा के अंतर्गत कई बोलिया पाई जाती हैं। बोली एक भाषा व उप-भाषा का वह स्थानीय रूप हैं, जिसमे कोई लिखित साहित्य नहीं होता हैं; अर्थात बोली का कोई लिखित रूप नहीं होता है। जब किसी बोली में श्रेष्ठ रचनाएँ होनी शुरू हो जाती है, तब वह बोली भी उप-भाषा का रूप ग्रहण कर लेती हैं।

भाषा का मानक रूप

भौगोलिक बनावट, जलवायु व लोक-जीवन के कारन किसी भी भाषा के उच्चारण व लिखित रूप में विविधिता आ जाती है। जिसे हमारे देश में ‘अ’ के उच्चारण व लिखित रूप में विभिन्न क्षेत्रों में विविधता पाई जाती हैं, इसी प्रकार त्र, क्त, झ, के प्रयोग में विभिन्नता पाई जाती है, इस प्रकार शब्दों व वर्णो की इस विविधता को समाप्त कर उसको एक रूपता प्रदान करना भाषा का मानक रूप कहलाता हैं।

भाषा की यह मानकता शिष्ट व विद्व्त जनों द्वारा निर्धारित की जाती है। भाषा के स्वरूप को सब जगह एक रूप में समझने के लिए उसे एक मानक (स्टैंडर्ड) रूप देना अति आवश्यक होता है। शिष्ट व विद्वानों द्वारा प्रयुक्त भाषा स्वत्: उसका मापदण्ड बन जाती है। अतः शिष्ट व सुशिक्षित जनों द्वारा व्यवहार में लाया जाने वाला स्वीकृत भाषा रूप मानक कहलाता हैं।

भाषा परिवार

संसार में प्रत्येक देशों में कई भाषाएँ बोली जाती है। इस समय सारे विश्व में लगभग तीन हज़ार भाषाओ का प्रयोग होता है। विश्व में भाषा वैज्ञानिको ने उन सभी  भाषाओ  को कुल बारह परिवारों में विभक्त किया हैं।  यह विभाजन उनकी उत्पति के आधार पर किया गया हैं। इसलिए उन्हें परिवार का नाम दिया है। भारत में इस समय उन बारह परिवारों में से दो भाषा परिवार प्रयोग में लाये जाते हैं।

(1) भारत युरोपीय परिवार :- यह संसार का सबसे बड़ा परिवार है। भारत व यूरोप में अधिकतर विद्वानों के मतानुसार संस्कृत इस परिवार का मूल स्रोत है। इस भाषा परिवार के अंतर्गत संस्कृत, अवेस्था, ग्रीक, लैटिन, अरबी, फ़ारसी, जर्मन, फ्रेंच, अंग्रेजी, रुसी, उर्दू, हिंदी, पंजाबी, बंगला, असमी, उड़िया, मराठी, गुजराती, आदि आती हैं।

(2) द्रविड़ भाषा परिवार :- यह भारत का दूसरा ‘भाषा परिवार’ है। इसके अंतर्गत दक्षिण भारत की भाषाएँ आती है, तमिल, तेलगु, कन्नड़, मलयालम, आदि दक्षिण भारत की भाषाएँ द्रविड़ परिवार के अंतर्गत आती हैं।

हिंदी भाषा का परिचय

हिंदी भाषा भारत की राष्टभाषा व राजभाषा है। यह ‘भारत’ यूरोपीय भाषा परिवार’ की प्रमुख भाषा हैं। यह देवनागरी लिपि में लिखी जाती हैं। हिंदी भाषा उतर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्यप्रदेश, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, के निवासियों की मातृ-भाषा हैं।

इसके अतिरिक्त भारत के अन्य क्षेत्रों में भी इसका प्रचुर प्रचार-प्रसार है। ‘भारत यूरोपीय भाषा परिवार, की अन्य भाषाओं की तरह हिंदी का मूल स्रोत भी संस्कृत ही है। इसका प्राचीनतम रूप वैदिक संस्कृत है।

हिंदी का उदभव

वैदिक संस्कृत से हिंदी तक आने में भाषा को अनेक पड़ावों (रूपों) से गुजरना पड़ा। उनके नाम इस प्रकार हैं।

  1. संस्कृत (वैदिक संस्कृत, लौकिक संस्कृत)
  2. पाली
  3. प्राकृत
  4. अपभृंश
  5. हिंदी

इस तरह संस्कृत से पांचवी पीढ़ी हिंदी का जन्म हुआ। भारत की अन्य आधुनिक भाषाओ का उद्भव भी हिंदी की तरह ही हुआ। भारत यूरोपीय भाषा परिवार की ‘भारतीय आर्य भाषा’ शाखा के अंतर्गत हिंदी के अतिरिक्त पंजाबी, कश्मीरी, सिंधी, गुजरती, मराठी, असमी, आदि आधुनिक भारतीय भाषा आती है। आधुनिक काल में हिंदी जिस रूप में अपनाई जाती हैं, उसको खड़ी बोली कहते हैं।

हिंदी की उप-भाषाएँ व बोलियाँ 

हिंदी भाषा क्षेत्र के अंतर्गत कई उप-भाषाएँ व बोलिया आती हैं। उन्हें पांच भागो में बाँट सकते हैं।

(1) पश्चिमी हिंदी :- इसके अंतर्गत ब्रज-भाषा, खड़ी-बोली, हरियाणवी, बुंदेली कन्नौजी आदि उप-भाषाएँ व बोलियाँ आती है। हिंदी की इन उप-भाषाओ में श्रेष्ठ ग्रंथो की रचनाएँ हुई है। ब्रज-भाषा में कई कृष्णा काव्यों का प्रणयम हुआ, जिनमे सूरदास रचित ‘सूरसागर’ एक उत्कृष्ट काव्य हैं।

(2) पूर्वी हिंदी :- इसके अंतर्गत अवधी, बघेली, छत्तीसगढ़ी, आदि बोलिया व भाषाएँ आती हैं। गोस्वामी तुलसीदास कृत ‘रामचरित मानस’ तथा मलिक मुहम्मद जायसी कृत ‘पद्मावत’ अवधी के प्रसिद्ध काव्य है।

(3) राजस्थानी :- मारवाड़ी, जयपुरी, मेवाती, मलबी आदि बोलिया इसके अंतर्गत आती हैं।

(4) पहाड़ी :- इसके अंतर्गत कुमाउँनी, व गढ़वाली उप-भाषाएँ आती हैं।

(5) बिहारी :- भोजपुरी, मगही, मैथली आदि बोलियाँ व उप-भाषाएँ इसके अंतर्गत आती है। ‘विद्यापति की पदावली’ मैथली की सुप्रसिद्ध रचना हैं।

भारत के राज्यों में बोली जाने वाली भाषाएँ

राज्य  भाषा 
दिल्ली हिन्दी, पंजाबी, उर्दू
उत्तर प्रदेश हिंदी, उर्दू
पश्चिम बंगाल बंगाली
छत्तीसगढ़ छत्तीसगढी
बिहार हिन्दी, मैथली, भोजपुरी
असम असमिया, बंगाली, हिंदी, बोडो और नेपाली
कर्नाटक कन्नड़, उर्दू, तेलुगू, मराठी और तमिल
आंध्र प्रदेश तेलुगु, उर्दू, हिंदी और तमिल
जम्मू एवं कश्मीर कश्मीरी, डोगरी और हिंदी

हिंदी भाषा का महत्व 

हिंदी भारत की राष्टभाषा हैं। भारत के सविधान में उसको राजभाषा का स्थान प्राप्त हैं। हिंदी भाषा भारत की एकता का प्रतीक हैं। भारत के किसी नहीं भाग में हम हिंदी के द्वारा अपना काम सरलता से चला सकते हैं।

उत्तर भारत के लगभग सभी प्रांन्तों में यह मातृभाषा के रूप में अपनाई जाती हैं। इसकी दिन प्रतिदिन लोकप्रियता बढ़ती जा रही है। भारत के सभी विश्वविधालयों में हिंदी का अध्ययन व अध्यापक होता है। संसार के लगभग सभी प्रमुख देशो के प्रमुख यूनिवर्सिटी में हिंदी पढाई जाती है। भारत की सामान्य जनता हिंदी से प्रेम करती है। हिंदी ने स्वतत्रंता आंदोलन में सभी नेताओ को जोड़ने का काम किया।  आज हिंदी की सर्वत्र लोक-प्रियता बढ़ती जा रही हैं।

(FAQs)

Q : Bhasha Kya Hain?

Ans : भाषा एक माध्यम है जिसके द्वारा हम अपने विचारो को दुसरो के सामने प्रकट करते हैं।

Q : Bhasha Ki Paribhasha

Ans : हम अपने भावों को लिखित अथवा कथित रूप से दूसरों  को समझा सके और दूसरे के भावों को समझ सके, उसे भाषा कहते हैं।

Q : Maukhik Bhasha Kise Kahate Hain?

Ans : अपने विचारों को बोलकर दूसरों के सामने प्रकट किया जाए तो उसे हम मौखिक भाषा कहते हैं।

Q : Maukhik Bhasha Ke Udaharan

Ans : मौखिक भाषा के उदहारण हैं- टेलीफोन, दूरदर्शन, रेडियो, भाषण आदि।

Q : Likhit Bhasha Kise Kahate Hain?

Ans : अपने विचारों को लिखित में व्यक्त करना, लिखित भाषा कहलाता हैं।

Q : Likhit Ke Udaharan

Ans : लिखित भाषा के उदहारण है- पत्र, समाचार-पत्र, कहानी, पुस्तक आदि।

Q : Sanketik Kise Kahate Hain?

Ans : जिन संकेतो  द्वारा बच्चे या गूंगे अपनी बात दूसरों को समझाते है, वे सब सांकेतिक भाषा कहलाती हैं।

Q : Sanketik Bhasha Ke Udaharan

Ans : सांकेतिक भाषा का उदहारण हैं- चौराहे पर खड़ा यातायात नियंत्रित करता सिपाही, मूक-बधिर वयक्तियों का वार्तालाप आदि।

Q : भाषा और लिपि में क्या अंतर है?

Ans : विचारों को व्यक्त करने वाली व्यवस्थित शब्दावली को भाषा कहते हैं। और भाषा को लिखने की विधि को लिपि कहते हैं ।

 

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